सिफरी द्वारा राष्ट्रीय रैन्चिंग कार्यक्रम-2022 का आयोजन
14 मई, 2022
भा.कृ.अनु.प.-केन्द्रीय अन्तर्स्थलीय मात्स्यिकी अनुसंधान संस्थान (ICAR-CIFRI), बैरकपुर, कोलकाता पहली बार ‘राष्ट्रीय रैन्चिंग कार्यक्रम-2022’ बड़े धूमधाम से मनाने जा रहा है हालांकि इस तरह के कार्यक्रम की शुरूआत सन 2018 से ही कर दिया गया था जिसके तहत लगभग 45 लाख से ज्यादा रोहू, कतला, कलबासु और मृगाल/नैनी मत्स्य प्रजातियों के फिंगरलिंग/अंगुलिका आकर के मत्स्य बीज गंगा नदी के नदीय मार्ग में आने वाले राज्यों (उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखण्ड और पश्चिम बंगाल) के विभिन्न नदी घाटों से छोड़ा जा चुका है लेकिन उक्त कार्यक्रम को इस बार मिशन स्तर पर किया जा रहा है जिसके तहत पंद्रह दिन के भीतर ही बीस लाख से ज्यादा मत्स्य बीज को छोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। इस कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए संस्थान ने गंगा के बहने वाले राजकीय नदीय मार्ग जैसे उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखण्ड और पश्चिम बंगाल में ‘नमामी गंगे’ परियोजना के तहत 14 मई 2022 से कई विभिन्न कार्यक्रम जैसे मत्स्य बीज को गंगा नदी में छोड़ना, डॉल्फिन व् जल संरक्षण और जन जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

रैन्चिंग कार्यक्रम का शुभारंभ दिनांक 14 मई 2022 को बैरकपुर से ‘राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन’ के महानिदेशक श्री जी. अशोक कुमार के करकमलों से हुआ। महानिदेशक ने कार्यक्रम का शुभारम्भ करने के दौरान बताया की नदियों में विशेषकर गंगा नदी में मत्स्य बीज को छोड़ने से पारिस्थितिकीय और आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण मत्स्य प्रजातियों का पुनर्रूद्धार होगा जिसके फलस्वरूप अर्थ गंगा के संकल्पना को पूरा करने के साथ-साथ गंगा नदी में मत्स्ययन से प्रत्यक्ष व् अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े लोगों की आजीविका को सुनिश्चित करने के साथ उनके आय में बढ़ोतरी करने में मददगार साबित होगी । सिफ़री के निदेशक और ‘नमामि गंगे’ परियोजना के प्रधान अन्वेषक डॉ. बसंत कुमार दास ने स्थानीय मछुआरों को गंगा नदी में प्राप्त मछलियों और डॉल्फिन के स्वास्थ्य और संरक्षण के पारिस्थितिक विषयों के बारे में जागरूक किया। सिफरी के निदेशक ने बताया की संस्थान और केंद्र सरकार के अंतर्गत आने वाले अन्य संस्थान गंगा नदी की मात्स्यिकी विशेषकर हिल्सा मात्स्यिकी, पुनर्रूद्धार व् संरक्षण के लिए कटीबद्ध है । पहले चरण में, 14 मई 2022 को बैरकपुर के गांधी घाट में 2 लाख से अधिक (रोहू, कतला, कलबासु और मृगाल/नैनी) फिंगरलिंग/अंगुलिका को गंगा नदी में छोड़ा गया। इसके साथ ही गंगा नदी के संरक्षण पर जन जागरूकता अभियान और ‘गंगा आरती’ का भी भव्य आयोजन किया गया ।

राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन प्रायोजित परियोजना के प्रमुख उद्देश्यों में मछली की विविधता का अन्वेषण, सर्वेक्षण, बहुमूल्य मछलियों जैसे रोहू, कतला, कलबासु, मृगाल/नैनी और महासीर के स्टॉक मूल्यांकन के साथ–साथ चयनित मछली प्रजातियों के बीज का उत्पादन और उसके स्टॉक में वृद्धि शामिल है। रोहू, कलबासु और मृगाल/नैनी जैसी मछलियाँ न केवल नदी के स्टॉक में वृद्धि करेंगी बल्कि नदी की स्वच्छता को बनाए रखने में भी मदद करेंगी । इस कार्यक्रम का आयोजन कोविड -19 के सभी प्रोटोकॉल का पालन करते हुए किया गया। समाज के सभी वर्गों के लोगों के बीच सक्रिय भागीदारी देखी गई और गंगा के तटवर्ती इलाकों के मछुआरों को गंगा के संरक्षण और उसके बहुमूल्य मछलियों के स्टॉक में वृद्धि के संदर्भ में जागरूक किया गया और संवेदनशील बनाया गया।




यह वेबसाइट भाकृअनुप-केन्द्रीय अन्तर्स्थलीय मात्स्यिकी अनुसंधान संस्थान, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, कृषि अनुसंधान और शिक्षा विभाग, कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार के तहत एक स्वायत्त संगठन से सम्बंधित है। कॉपीराइट @ 2010 आईसीएआर, यह वेबसाइट 2017 से कृषि ज्ञान प्रबंधन इकाई द्वारा विकसित और अनुरक्षित है।
अंतिम बार1 5/05/22 को अद्यतन किया गया